The Difference Between "Natural" & "National" Laws
*The Difference Between "Natural" & "National" Laws ---------------------------------------------- *प्राकृतिक नियम औऱ राष्ट्र निर्मित नियम मे अंतर-------------- प्राकृतिक नियम वो होते है जो स्वयं बने होते हैं अथवा दिव्य शक्ति के द्वारा निर्धारित होते हैं। जैसे सूर्य का अपने निर्धारित समय से उगना अथवा अस्त होना।चंद्रमा का अपने निर्धारित समयानुसार आना, बड़ा अथवा छोटा होना ।एक फिक्स समयानुसार गर्मी की ऋतु, वर्षा की ऋतु, जाड़ो (ठंड ) की ऋतु का आना जाना प्राकृतिक नियमो के अनुसार ही होता है। उसी प्रकार से व्यक्ति की प्रकृति मे उसे नमकीन अथवा मीठी चीजो का पसंद होना व्यक्ति की प्रकृति अथवा प्रकृतिनुसारी नियम के मुताबिक होता है।। राष्ट्र निर्मित नियम अथवा व्यक्ति प्रदत नियम वो होते हैं जो व्यक्ति अथवा व्यक्तियों द्वारा निर्मित किये जाते हैं अथवा निर्धारित कर दिये जाते हैं। जैसे संसद द्वारा कानून बनाना, संविधान बनाना, संविधान संशोधन करना आदि राष्ट्र नियम (National Law's) कहलाते हैं ।जो कि राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार किये जाते है राष्ट्र निर्मित अथवा व्यक्ति निर्मित नियम कहलाते हैं। अतः किसी भी देश का राष्ट्र निर्माण इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी चेतना {consciousness} का स्तर कैसा है उस देश की राष्ट्रीय चेतना का स्तर कैसा है। @जैसी चेतना वैसा परिदृश्य* । हमारे देश मे भी अगर संविधान निर्माण के समय परिष्कृत चेतना के स्तर पर नियमो का समावेश किया गया होता तो आज देश के सामने इतनी जटिलताएं समस्यायें नही होती। कृषि प्रधान देश होने के बाबजूद कृषि की समस्या, धार्मिक देश होने के बाबजूद अधर्म की समस्या। आध्यात्मिक (spritual/Right way of thinking) होने के बाबजूद भ्रस्टाचार की समस्या, निर्धारित कर्म होने के बाबजूद आरक्षण की समस्या।संविधान का निर्माण होजाने के बाबजूद जनसंख्या की विकराल समस्या।रोटी कपड़ा और मकान का मौलिक अधिकार होने के बाबजूद आवास की समस्या। नियम बनाने के बाबजूद सिस्टम को follow ना करना एक बड़ी समस्या/चुनौती है system को follow ना करना ,human error का जीता जागता उदाहरण आप प्रथम दृष्ट्या मैं उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन मे हुई दुर्घटना का उदाहरण है। लोग निर्धारित नियमों को धता बताकर मनमानी करने लगी है। यही अशिक्षा का कारण है।शिक्षा को मौलिक अधिकार बताते हुए भी लोग शिक्षित नही हो पा रहे है। अतः ऑटोमेशन इन एडमिनिस्ट्रेशन आना चाहिए।यानी व्यक्ति के अंदर से आना चाहिए कि क्या गलत है और क्या सही है।सामूहिक चेतना में सुधार की जरूरत है। जय हिंद, जय भारत। उन सभी भक्तों को समर्पित जो राष्ट्र निर्माण मे लगे हुए हैं। बृजेश जोशी।
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