चेतना
*परिष्कृत चेतना ही आदर्श जीवन जीने का आधार है *। परिष्कृत चेतना का अर्थ है विशुद्ध निर्मल चेतना ।यानी जिसकी चेतना (consciousness) की स्तर जितनी निर्मल होगी व्यक्ति का जीवन उतना ही सरल होगा । और वही उसके आदर्श जीवन जीने का आधार होगा। * स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती*शंकराचार्य ज्योतिर्मठ । गुरूदेव अब ब्रह्मलीन हो चुके हैं। *उपरोक्त बिषय मे मेरा प्रकाश डालने का यह मकसद है कि जो भी व्यक्ति अपनी चेतना को परिष्कृत करना चाहते हैं, उन्हें यह भी एहसास होना चाहिये कि चेतना के कितने स्तर होते हैं। चेतना जिसे हम विशुद्ध ज्ञान का स्तर भी कहते हैं ,के 7 स्तर होते हैं जो कि इस प्रकार है :-
1-बैखरी की चेतना,
2-स्वप्न्न की चेतना,
3-सुषुप्ति की चेतना,
4- तुरीय चेतना,
5-तुरीयातीत चेतना ,
6-भगवत चेतना,
7-ब्राह्मी चेतना।
1-WAKING CONSCIOUSNESS,
2-DREAMING CONSCIOUSNESS,
3-SLEEPING CONSCIOUSNESS,
4- TRANSCENDENTAL CONSCIOUSNESS,
5- COSMIC CONSCIOUSNESS,
6-GOD CONSCIOUSNESS,
7-UNITY CONSCIOUSNESS.
उपरोक्त चेतना के स्तरों पर पहुँचने पर ही व्यक्ति को उसका परसेप्शन समझ मे आता है। चेतना की इन उच्च पराकाष्ठा ओ पर पहुँचने के लिए व्यक्ति को ध्यान की आवश्कता होती है। और ध्यान की वह अवस्था जहाँ पर व्यक्ति beyond the thought वाली स्टेज मे पहुँचे।जहाँ पर किसी भी प्रकार का तनाव न हो।जहाँ पर व्यक्ति एकदम चिंता मुक्त हो।और वही चिंता मुक्त जीवन उसके आदर्श जीवन जीने का आधार बनता है। जहाँ पर नींद पूरी करने के उपरांत भी थकान महसूस ना हो।ताजगी बनी रहे। तथा मन बिल्कुल बोझिल न हो।तभी आप एक आदर्श जीवन शैली जी सकते है। उन सभी लाभार्थियों को समर्पित जो एक उज्जवल भविष्य जीना चाहते हैं। जय हिंद जय गुरुदेव।। बृजेश जोशी ।
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