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Showing posts from March, 2017

योगः कर्मसु कौशलं।

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                                                            योगः कर्मसु कौशलं। यह योग विद्या है।यह योग विद्या उनके लिए है जो अधिक जिम्मेवारी लेते हैं ,जो बड़े काम करना चाहते हैं ।क्योंकि इस योग विद्या से चेतना गठित होती है और जितने प्रकृति के नियम हैं वो सब गठित चेतना में सजीव रहते हैं,तो सारी प्रकृति के नियमों का सहारा प्रत्येक विचार की मिल जाता है ।सब काम सरलता से होने लगते हैं ;बड़े-बड़े काम भी जल्दी से,बिना समस्याओं के पूरे होते जाते हैं ।योग विद्या की बड़ी महिमा है -योग ,संहिता तत्व ही,संहिता ही,ठीक है-हमारा वेद विज्ञान ही है -इसकी महिमा अपार है। सौजन्य से UHCRA Show More Reactio

Vedic approach to Health

Uttaranchal Health Care & Research Association-Work through Vedic Approach to Health,which is holistic,prevention-oriented & free from harmful side-effects,creating balance between consciousness and physiology,balance between physiology of the individual and the physiology of the universe,and between the individual mind and the Cosmic Mind.This system of health care is competent to create and maintain the good health of the individual and society and offers to create and maintain a disease-free society and a problem free nation-{Knowledge given by -Maharishi Ji}.

Effects Of Tension

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About U.H.C.R.A

चेतना को परिष्कृत करने के लिए उत्तरांचल हेल्थ केयर एंड रिसर्च एसोसिएशन ने बीड़ा उठाया है और पूज्य महर्षि महेश योगी जी द्वारा प्रदत्त ज्ञान को बांटा जा रहा है आदि गुरु शंकराचार्य जी से लेकर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती को परंपरागत रूप से परिवर्तित ज्ञान को महर्षि जी द्वारा मुझे दिया गया है जिसे हम लोग समाज को देने के लिए कृत संकल्प हैं। आत्मा:-'Maharishi Vedic Knowledge will unfold the Unlimited treasures of total knowledge, pure knowledge, latent within t he Self of everyone-आत्मा which is the fountainhead of all knowledge, bliss, and power-The infinite organizing power Natural Law' -Maharishi 'UHCRA will deliver the FRUIT OF ALL KNOWLEDGE to everyone - The natural and spontaneous ability to move in the right direction and achieve the laudable goals of life- daily life according to Natural law,Kanune Kudrat,Guru Wani.' -Jai Guru Dev

Tension

                               UTTARANCHAL HEALTH CARE & RESEARCH ASSOCIATION                                                                 UTTARAKHAND,INDIA                                                                      तनाव (Tension) तनाव ग्रस्त जीवन प्रत्येक के विकास मे एक बड़ा अवरोध है।तनाव के चलते आज व्यक्ति असहज जीवन जी रहा है और मानसिक विक्षिप्ता जैसी घातक बीमारियों का शिकार होने लगा है। जिसके चलते सामाजिक जीवन मे समरसता,समन्वयता,शांति का आभाव होने लगा है। तनाव क्या है? हमारे जीवन के अनुभवों पर जो कारक अवांछित प्रभाव डालते हैं यानि इच्छा के प्रतिकूल प्रभ...

तनाव विमोचन

*तनाव विमोचन*     साधारणतया तनाव का होना व्यक्ति के प्रकृति पर निर्भर करता है।और किसी भी व्यक्ति की प्रकृति कैसी होगी वह उसके प्रारब्ध पर निर्भर रहती है।लेकिन मनुष्य योनि मे जन्म लेने के बाद उसकी प्रवृति उसका विमोचन/ निराकरण करने की होनी चाहिए, ताकि वह ऊर्जावान होकर सहज ज़िन्दगी जी सके  मनुष्य का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है।इसलिए उसके जीवन मे तनाव व अवसाद सामान्य सी बात है,लेकिन हमें हरदम इनसे मुक्ति का प्रयास करना चाहिये।ऐसा इसलिए क्योंकि तनाव ही तमाम तरह की बीमारियों और रोगों का कारण है हमारे जीवन मे कई वजहों से तनाव उत्पन्न होता है।कई बार हमारे सामने ऐसी परिस्थियां आजाती है कि वे हमें भयभीत करने लगती है,और इस वजह से हम तनाव ग्रस्त होजाते है।ऐसी स्थिति में हमे अपना पूरा हौसला बनाये रखना चाहिए, और बेबजह तनाव लेने के बजाय विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए।जो लोग वर्तमान मे व्यवस्थित जीवन नही जीते है और अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहते है ऐसे लोग ही तनावग्रस्त होते है दूसरा जो लोग अनावश्यक संकल्प लेकर कार्य करते है और संकल्प पूर्ण नही होने प...