तनाव विमोचन
*तनाव विमोचन*
साधारणतया तनाव का होना व्यक्ति के प्रकृति पर निर्भर करता है।और किसी भी व्यक्ति की प्रकृति कैसी होगी वह उसके प्रारब्ध पर निर्भर रहती है।लेकिन मनुष्य योनि मे जन्म लेने के बाद उसकी प्रवृति उसका विमोचन/ निराकरण करने की होनी चाहिए, ताकि वह ऊर्जावान होकर सहज ज़िन्दगी जी सके मनुष्य का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है।इसलिए उसके जीवन मे तनाव व अवसाद सामान्य सी बात है,लेकिन हमें हरदम इनसे मुक्ति का प्रयास करना चाहिये।ऐसा इसलिए क्योंकि तनाव ही तमाम तरह की बीमारियों और रोगों का कारण है हमारे जीवन मे कई वजहों से तनाव उत्पन्न होता है।कई बार हमारे सामने ऐसी परिस्थियां आजाती है कि वे हमें भयभीत करने लगती है,और इस वजह से हम तनाव ग्रस्त होजाते है।ऐसी स्थिति में हमे अपना पूरा हौसला बनाये रखना चाहिए, और बेबजह तनाव लेने के बजाय विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए।जो लोग वर्तमान मे व्यवस्थित जीवन नही जीते है और अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहते है ऐसे लोग ही तनावग्रस्त होते है दूसरा जो लोग अनावश्यक संकल्प लेकर कार्य करते है और संकल्प पूर्ण नही होने पर भी तनाव का शिकार होजाते है। हम जीवन मे वही टारगेट रखें जिन्हें हम पूर्ण कर सकते हैं अथवा कर सकें।जिससे हमें खुशी मिल सके और तनाव भी न बने। तनाव तब भी बनते हैं जब हम अपने विचार दूसरों पर थोपकर उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।आप किसी के समक्ष अपने विचार जरूर रख सकते हैं लेकिन उसे अपनाने या त्यागने के लिए सम्बंधित व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वतंत्र है।इसके साथ ही प्रत्येक मनुष्य को यह बात भी गाँठ बाद लेनी चाहिए की दुनिया पूरी तरह उनके हिसाब से नही चलती है।याद रखें कि हम केवल अपने ऊपर ही नियंत्रण रख सकते हैं इसलिए दूसरों को नियंत्रित करने से पहले हमें स्वयं को काबू में रखने का प्रयास करना चाहिए।यदि आप तनाव मुक्त रहना चाहते हैं तो इसका एक ही उपाय है की आप हमेशा सकारात्मक माहौल व व्यक्तियों के स्मोर्क में रहें।नकारात्मक्ता ही तनाव का मुख्य कारण है प्रत्येक व्यक्ति को इससे बचकर रहना चाहिए।उद्धारण के लिए आप देखते हैं एक राजनेता अपने बेटे को राजनेता,एक अभिनेता अपने बेटे को अभिनेता,एक व्यवसायी अपने बेटे को व्यवसायी बनाने का प्रयास करता है।अगर हम उस परंपरा से हटकर कार्य करने का प्रयास करें तो भी तनाव होता है।
साधारणतया तनाव का होना व्यक्ति के प्रकृति पर निर्भर करता है।और किसी भी व्यक्ति की प्रकृति कैसी होगी वह उसके प्रारब्ध पर निर्भर रहती है।लेकिन मनुष्य योनि मे जन्म लेने के बाद उसकी प्रवृति उसका विमोचन/ निराकरण करने की होनी चाहिए, ताकि वह ऊर्जावान होकर सहज ज़िन्दगी जी सके मनुष्य का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा है।इसलिए उसके जीवन मे तनाव व अवसाद सामान्य सी बात है,लेकिन हमें हरदम इनसे मुक्ति का प्रयास करना चाहिये।ऐसा इसलिए क्योंकि तनाव ही तमाम तरह की बीमारियों और रोगों का कारण है हमारे जीवन मे कई वजहों से तनाव उत्पन्न होता है।कई बार हमारे सामने ऐसी परिस्थियां आजाती है कि वे हमें भयभीत करने लगती है,और इस वजह से हम तनाव ग्रस्त होजाते है।ऐसी स्थिति में हमे अपना पूरा हौसला बनाये रखना चाहिए, और बेबजह तनाव लेने के बजाय विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करने के लिए खुद को तैयार रखना चाहिए।जो लोग वर्तमान मे व्यवस्थित जीवन नही जीते है और अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहते है ऐसे लोग ही तनावग्रस्त होते है दूसरा जो लोग अनावश्यक संकल्प लेकर कार्य करते है और संकल्प पूर्ण नही होने पर भी तनाव का शिकार होजाते है। हम जीवन मे वही टारगेट रखें जिन्हें हम पूर्ण कर सकते हैं अथवा कर सकें।जिससे हमें खुशी मिल सके और तनाव भी न बने। तनाव तब भी बनते हैं जब हम अपने विचार दूसरों पर थोपकर उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।आप किसी के समक्ष अपने विचार जरूर रख सकते हैं लेकिन उसे अपनाने या त्यागने के लिए सम्बंधित व्यक्ति पूर्ण रूप से स्वतंत्र है।इसके साथ ही प्रत्येक मनुष्य को यह बात भी गाँठ बाद लेनी चाहिए की दुनिया पूरी तरह उनके हिसाब से नही चलती है।याद रखें कि हम केवल अपने ऊपर ही नियंत्रण रख सकते हैं इसलिए दूसरों को नियंत्रित करने से पहले हमें स्वयं को काबू में रखने का प्रयास करना चाहिए।यदि आप तनाव मुक्त रहना चाहते हैं तो इसका एक ही उपाय है की आप हमेशा सकारात्मक माहौल व व्यक्तियों के स्मोर्क में रहें।नकारात्मक्ता ही तनाव का मुख्य कारण है प्रत्येक व्यक्ति को इससे बचकर रहना चाहिए।उद्धारण के लिए आप देखते हैं एक राजनेता अपने बेटे को राजनेता,एक अभिनेता अपने बेटे को अभिनेता,एक व्यवसायी अपने बेटे को व्यवसायी बनाने का प्रयास करता है।अगर हम उस परंपरा से हटकर कार्य करने का प्रयास करें तो भी तनाव होता है।
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