Tension

                               UTTARANCHAL HEALTH CARE & RESEARCH ASSOCIATION
                                                                UTTARAKHAND,INDIA
                                                                     तनाव (Tension)
तनाव ग्रस्त जीवन प्रत्येक के विकास मे एक बड़ा अवरोध है।तनाव के चलते आज व्यक्ति असहज जीवन जी रहा है और मानसिक विक्षिप्ता जैसी घातक बीमारियों का शिकार होने लगा है। जिसके चलते सामाजिक जीवन मे समरसता,समन्वयता,शांति का आभाव होने लगा है।
तनाव क्या है? हमारे जीवन के अनुभवों पर जो कारक अवांछित प्रभाव डालते हैं यानि इच्छा के प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं तनाव कहते हैं। यह एक मनोकायिकी अवयवस्था है।
तनाव आता कहाँ से है? यह एक मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा ऐसा कारक है जो व्यक्ति के पैदा होने ही शुरू हो जाता है और जीवन पर्यंत चलता रहता है और जिसका अपना एक श्रोत होना है जो व्यक्ति को उसकी सहनशीलता,उसके स्वभाव,उसके जीवन जीने के तरेके के आधार पर प्रभावित करता है,उसे झकझोर देता है।यानि जो हमारी आंतरिक व्यवस्था से जुड़ा हुआ होता है,बाहर निकलकर आता है।
तनाव होता क्यों है?यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो की व्यक्ति के रहन-सहन,प्रकृतिक एवं शारीरिक व्यवस्था,सामाजिक वातावरण तथा सहनशीलता की कमी के कारण होता है।
तनाव का दुष्परिणाम क्या होता है?तनाव के चलते होने वाले दुष्परिणामों को परिभाषित करने की आवश्यकता नहीं है। सभी लोग वस्तुत: यह जानते हैं कि तनवों के चलते हमारे मन मे एक मानसिक विकृति आ जाती है।जो कि निम्न तरह से प्रभावित करती है,प्रमुख निम्न दुष्परिणाम सामने आते हैं।
1.व्यक्ति के संकेन्द्रण शक्ति (Concentration Power)खत्म हो जाती है जिसके चलते व्यक्ति मन का पूरा उपयोग नहीं कर पता है।
2.स्मरण शक्ति (Memory) मे कमी आने लगती है जिससे वह अपना उद्देश्य(Aim) प्राप्त नहीं कर पता है।
3.व्यक्ति कि रोग प्रतिरोधक क्षमता(Immune) क्षिण हो जाती है जिससे हर छोटे-छोटे रोग उसे भयावह लाग्ने लगते हैं या प्रतीत होते हैं।
4.तनवों के चलते व्यक्ति उस असहजता को दूर करने के लिए फिर नशीली वस्तुओं का सेवन करने लगता है और फिर उसके शरीर के अंगों का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पता और किसी न किसी समस्या को जन्म देने लगता है।
5.सबसे बड़ी भयावह स्थिति तो तब हो जाती है जब व्यक्ति कि सहनशीलता 0 हो जाती है तो वह आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर ही जाता है अथवा आत्महत्या का कारण बन जाता है।
6.आज समाज में हो रहे असामाजिक कृत्य जैसे आतंकवाद,नरसंहार,बलात्कार आदि गतिविधियां मानसिक विकृति का ही परिणाम हैं,जब व्यक्ति अपने स्वयं में स्थित नहीं हो पाता है तब वह इस प्रकार कि मैनीपुलेटिड गतिविधियों मे लिप्त हो जाता है और मानवीय मूल्यों को समझ नहीं पाता है।
7. तनवों के चलते व्यक्ति आज इस तरह विकृत होने लगा है कि व्यक्तियों में एकरूपता का समन्वय स्थापित नहीं कर पा रहा है,एक Uniformity स्थापित नहीं कर पा रहा है।सामाजिक समरसता का आभाव होने लगा है।संकीर्णता(Complex) का शिकार होने लगा है।परस्परिक वैमनस्यता बहुत ज्यादा बदने लगी है।मानवीय मूल्यों का महत्व खत्म सा होने लगा है।Social Interaction कम होने लगा है।
8.अनावश्यक क्षेत्र मे व्यक्ति कि ऊर्जा लाग्ने के कारण वह यह निर्णय नहीं कर प रहा है कि क्या उचित है,क्या नही?यानि व्यक्ति कि तर्क विभेदक शक्ति कम होने लगी है।
तनवों के प्रकार कैसे होते हैं-व्यक्ति की स्वाभाविक प्रवृति के आधार पर तनवों को 2 प्रकार मे बाँट सकते हैं-
1. स्थूल स्तर के तनाव -पहले प्रकार के तनाव जिने हम Fatigue कह सकते हैं जो कि थकान हो जाने के कारण होते हैं और शरीरिकी प प्रभाव डालते हैं।
2.सूक्श्म स्तर के तनाव-दूसरे प्रकार के तनाव जिन्हें हम Stress कह सकते हैं मानसिक स्थिति पर आधारित होते हैं और ज्यादा प्रभावी रूप से मानसिक स्थिति को झकझोर देते हैं।
तनवों के समाधान या उपचार-जैसा कि आप सभी जानते हैं सम्पूर्ण जैविक क्रियाएँ हमारी तंत्रिका-तंत्र(Nervous System) के द्वारा नियंत्रित की जाते है हैं और Nervous System का सीधा प्रभाव शारीरिकी पर पड़ता है और तांत्रिका-तंत्र का क्रियात्मक रूप मानवीय प्रवृति पर आधारित होता है और वह प्रवृति उसकी चेतना(Consiousness) पर आधारित होती है।
अतः जिसकी चेतना जैसी होगी वैसा वह व्यवहार करेगी इसलिए चेतना को सही परिष्कृत करना पड़ेगा।इसे कैसे परिष्कृत करना है और कैसे सही और पूर्ण रूपेण सकारात्मक फल मिलना है के लिए Uttranchal Health Care & Research Association कई वर्षों से रिसर्च कर रहा है।जिसके अंतर्गत पूज्य Maharishi Mahesh Yogi एवं उनके गुरु ज्योतिर्मठ शंकराचार्य श्री स्वामी ब्रहानंद सरस्वती जी के द्वारा प्राप्त सिद्धियों से मैं समाज के हित मे अनवरत प्रयासरत हूँ और गुरुदेव से प्राप्त सिद्धियों से लोगों कि सेवा कर रहा हूँ।
जय गुरु देव
Maharishi Ji के जन्मशताब्दी वर्ष 2017 एवं उनके जन्मदिन 12 जनवरी की पूरसंध्या पर गुरुदेव को समर्पित एवं सत-सत नमन।
बृजेश जोशी
TM एवं TM Sidhi Administrator
Uttaranchal Health Care & Research Association
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