योगः कर्मसु कौशलं।

                                                            योगः कर्मसु कौशलं।
यह योग विद्या है।यह योग विद्या उनके लिए है जो अधिक जिम्मेवारी लेते हैं ,जो बड़े काम करना चाहते हैं ।क्योंकि इस योग विद्या से चेतना गठित होती है और जितने प्रकृति के नियम हैं वो सब गठित चेतना में सजीव रहते हैं,तो सारी प्रकृति के नियमों का सहारा प्रत्येक विचार की मिल जाता है ।सब काम सरलता से होने लगते हैं ;बड़े-बड़े काम भी जल्दी से,बिना समस्याओं के पूरे होते जाते हैं ।योग विद्या की बड़ी महिमा है -योग ,संहिता तत्व ही,संहिता ही,ठीक है-हमारा वेद विज्ञान ही है -इसकी महिमा अपार है।
सौजन्य से
UHCRA
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