कुसंगति
*कुसंगति का ज्वर सबसे खतरनाक होता है*-------------------यह कथन भारतीय हिन्दी साहित्य के श्री राम चन्द्र शुक्ला का है। यह बात दुनिया के 100%लोग समझते ही है।परंतु यह किस तरह से खतरनाक होता है इसको समझना थोड़ा कठिन होता है ।मस्तिष्क स्तर पर इसका प्रभाव कैसे पड़ता है इस बात पर प्रकाश डालने का का प्रयास करेंगे---------------------यहाँ पर 2 picture हैं ।पहली पिक्चर यह दर्शा रही है कि किस तरह एक सड़े हुए सेब से अन्य सेबों की भी इमेज खराब हो जा रही है। दूसरी पिक्चर यह दर्शा रही है कि मस्तिष्क के स्तर पर इसका प्रभाव कैसे पड़ता है।इसको प्रसिद्ध भौतिकी बैज्ञानिक मेस्सनेर ने समझाया है।--------------------------------- जिसे Meissner Effect के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर मेस्सनेर ने यह समझाया है कि किस तरह ऑर्डिनरी इलेक्ट्रिकल कंडक्टर मे डिसॉर्डर incoherent इलेक्ट्रान बाहरी चुम्बकीय शक्ति द्वारा penetrate कर दिये जाते हैं। और जब कि सुपर कंडक्टर जिसमें इलेक्ट्रान coherencce oderliness होता है को मैग्नेटिक फील्ड (बाहरी चुम्बकीय शक्ति)का कोई प्रभाव नही होता है।। इसी प्रकार हमारी मस्तिष्क की स्थिति भी होती है। जब हम पैदा होते हैं यानी जब जन्म लेते हैं तब तनाव इतने नगण्य होते हैं कि बाहरी आडंबरों का कोई भी प्रभाव नही पड़ता है, वही जब वह परिपक्व हो जाता है तब वह अपने दिमाग मे इतने तनाव इखट्टा कर लेता है कि फिर उसे वास्तविक (real) चीजो का अनुभव नही हो पाता है और वह संक्रमकता का शिकार हो जाता है ।क्योंकि उसके मस्तिष्क का क्रमबद्धता (orderliness) प्रभावित हो जाती है।जिससे वह फिर गलत सही चीजों का आकलन नही कर पाता है। इन सभी कारकों से प्रभावित होने मे कुसंगति का भी अहम भूमिका होती है इसलिये संगति भी अच्छी होनी चाहिए ताकि उसके नकारात्म प्रभाव आप पर पड़ ना पाये। तथा नकारात्मक विचारधारा के लोगो से बचना चाहिए जिनका उद्देश्य केवल नकारत्मकता फैलाना होता है। उन सभी सज्जनो को संपर्पित जो एक आदर्श जीवन जीना चाहते है। शुभेच्छु , जय हिंद, जय भारत। बृजेश जोशी ।
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