*वट सावित्री व्रत का महात्मय*

                                           *वट सावित्री व्रत का महात्मय*
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आज वट सावित्री अमावस्या का व्रत है,आज का यह व्रत भारत वर्ष मे हिन्दू धर्म की सौभाग्यवती महिलाएँ अपने सौभाग्य की रक्षा के लिए करती हैं कारण यह है------------------------------------------------------
*क्षिति,जल,पावक,गगन,समीरा ये पञ्च तत्व अधम शरीरा*।
कहने का मतलब यह है कि इन पाँच तत्वों से शरीर का निर्माण हुआ है।ये तत्व क्रमश: पृथ्वी तत्व,जल तत्व,अग्नि तत्व,आकाश तत्व,वायु तत्व हैं।इन पाँच महाभूतों के संगठन से शरीर का निर्माण होता है और जब प्राणी की मृत्यु होती है तब इन पाँच महाभूतों से वायु तत्व अलग हो जाता है और फिर शरीर शव कहलाता है।पौराणिक कथाओं के हिसाब से सावित्री के साथ भी कुछ ऐसी घटना घटी जिससे उसने अपने पति के प्राणो को वापस सत्यवान के शरीर मे वापस ला दिया।हुआ यूं तात्कालिक समय मे स्वयंवर की प्रथा थी और कन्याएँ अपने लिए वर स्वयं चुनती थी।कालांतर मे जब सावित्री बड़ी हुई और उसके मता-पिता ने उसे भी स्वयं वर चुनने की आज्ञा दी तो वह अपने पिता की आज्ञा का अनुपालन करते हुए उसने एक लकड़हारे को अपना वर चुना और तब ज्योतिशयों ने उसे बताया की बेटा सावित्री जिसे तुमने अपना वर चुना है उसकी उम्र आज से मात्र डेढ़ वर्ष की है।अतः तुम कोई दूसरा वर चुनो तब सावित्री ने उत्तर दिया-"मैंने उसका वरण कर लिया है।अब मे अपना निर्णय परिवर्तित नही कर सकती हूँ क्योंकि *रघुकुल रीति सदा चली आई,प्राण जाए पर वचन न जायी*।" और तब सावित्री की शादी उस सत्यवान के साथ हो गयी जिसकी उम्र मात्र डेढ़ वर्ष शेष थी।व्यवहिक जीवन का निर्वहन करने के साथ आजीविका चलाने हेतु वह रोज़ अपने पति के साथ जंगल जाकर लकड़िया लाया करती थी।कालांतर मे जब डेढ़ वर्ष पूरा हुआ तो वह भी सत्यवान के साथ ही जंगल गयी थी तब सत्यवान लकड़ी काटने हेतु पेड़ पर चड़ा तब अचानक उसके सर मे दर्द होने लगा और वह पेड़ से नीचे उतरकर के सावत्रि से सर दबाने के लिए कहने लगा और तब सावित्री उसके सर दबाते हुए अंतरध्यान हो जाती है और सोचती है की आज से डेढ़ वर्ष पूर्व जो बात ज्योतिशयों ने बताई थी कहीं वह सच तो नही हो जाती है और वह सोचते-सोचते सत्यवान को गोद मे ही रखकर अचेत हो जाती है और तब उसे भैंस मे बैठे हूर यमराज के दर्शन होते हैं।और यमराज उससे कहते हैं यह मेरा शिकार है तुम इसे छोड़ दो वह इस बात पर राजी नही होती है और वह कहती है यह तो मेरा पति है तुम इसे क्यों अपना शिकार बता रहे हो तब यमराज जबर्दस्ती उसके प्राणों को छीनने का प्रयास करता हैतब सावित्री उसको गोद मे लिए ही यमराज का विरोध तथा विलाप करती है तब यमराज सावित्री से कहता है की तुम इसे मुझे दे दो और इसके बदले कोई दो वर माग लो तब सावित्री ने दो वर मागे एक तो-"मे पुत्रवती हो जाऊँ "
और दूसरा मुझे-"गरीबी से मुक्ति मिले" यमराज ने कहा तथास्तु।फिर उसके बाद भी सावित्री ने सत्यवान को नही छोड़ा और कहा आपने मुझे वरदान दिया की मे पुत्रवती हो जाऊँ तो क्या यह संभव है की मेरे पति को आप हर ले जा रहे हैं तब यमराज ने अपनी दिये हुए वचनों की प्रतिज्ञा से,ब्रह्मा से अनुमति लेकर सत्यवान के प्राणों को लौटा दिया और तब फिर सत्यवान को आयु प्राप्त हो गयी और गरीबी भी मिट गयी इस प्रकार कहा जाता है की जब तक प्राणवायु आभामंडल मे हो तब तक उसे यमराज के द्वारा भी नही छीना जा सकता है।जब तक आप उसके प्रति संकल्पित और समर्पित हों इस प्रकार सावित्री ने इन पाँच महाभूतों से वायु तत्व को अलग नही होने दिया और अपने पति की जिंदगी को वापस लाई और सौभाग्य को प्राप्त किया।
सभी धार्मिक एवं आस्थावान महिलाओं को उनके सुखद उद्देश्यों की आपूर्ति हेतु समर्पित। जय हिन्द।जय भारत।

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