*हिन्दू धर्म की सांस्कृतिक महत्ता का प्रत्यक्ष प्रमाण*
*हिन्दू धर्म की सांस्कृतिक महत्ता का प्रत्यक्ष प्रमाण* --------------------------------------------------------------------------प्रश्न संख्या:-1, आज का प्रश्न है कि हनुमानजी की पूजा क्यों की जाती है? उत्तर:- हिन्दू धर्म में हनुमानजी की पूजा का विशेष रूप से आधिभौतिक, आधिदैविक और आधिअध्यात्मिक महत्त्व होता है। क्योंकि हनुमानजी त्रेता युग से अभी तक वानर रूप मे जीवंत अवतार हैं और *अष्ट सिद्धि*नव निधि के दाता है।प्रश्न आता है कि ये अष्ट सिद्धिया क्या है। पतञ्जलि के अनुसार:- *त्तोणिमादिप्रादुर्भाव:कायसम्पतद्धमारनभिघातक्ष्य। यानी ये 8 सिद्धिया और लक्षण निम्नलिखित है। 1अणिमा:-अणु के समान सूक्ष्म रूप धारण कर लेना, जो कि हनुमानजी ने सुरसा के मुख में एवम लंका में प्रवेश करते समय किया था।(रामायण सुन्दर कांड) 2:-लघिमा:- शरीर को हल्का कर देना। इशसे जल, पंक और कंटक आदि से बाधा नही होती है और आकाश में गमन करने की शक्ति आजाती है ( योगः3/42). 3;-महिमा:- शरीर को बढ़ा कर लेना।जोकि हनुमानजी ने सुरसा के सामने किया था।(रामायण सुंदर कांड). 4:-गरिमा:-शरीर को भारी कर लेना। जोकि हनुमानजी ने भीमसेन के मार्ग में रुकावट डालते समय किया था।( महा० वन०146-147 वां अध्याय) . 5;-प्राप्ति:-जिस किसी इच्छा युक्त भौतिक प्रदार्थ को संकल्प मात्र से ही प्राप्त कर लेना। 6:-प्राकाम्य:- बिना रुकावट भौतिक प्रदार्थ- सम्बन्धी इच्छाओं की पूर्ति अनायास हो जाना।। 7;-वशित्व:- पांचो भूतों का और तज्जन्य प्रदार्थो का वश में हो जाना।। 8:-ईशित्व:-उन भूत औऱ भौतिक प्रदार्थो का नाना रुप मे उत्पन्न करने की ओर उन पर शासन करने की सामर्थ्य। ये उपरोक्त आठ सिद्धिया हनुमानजी के पास मे थी। इसलिए हनुमानजी की पूजा का कलयुग में विशेष महत्व है। इसके अलावा हनुमानजी बल बुद्धि और विद्या के भी प्रदाता हैं अतः हनुमानजी की पूजा कलयुग में श्रेस्कर है और पूजा की जाती है। जय हनुमानजी। इसी प्रकार आज धन तेरस है।परसों यानी 19 अक्टूबर 2017 को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।जो कि लक्ष्मी जी के आगमन हेतु प्रकाशोत्सव के रूप मे मनाया जाता है। ऋतुओं और (सूर्य और पृथ्वी की गति के चलते) तिथियों के चलते जल्दी आ गयी है।खुशियों के साथ मनाए। शुभकामनाओ सहित। बृजेश जोशी।जय हिंद।
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