आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
**आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस
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आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जायेगा इस योगः की विधा को अंतरराष्ट्रीय मूर्त रूप दे देना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की एक अति महत्वपूर्ण उपलब्धि ही नही है अपितु पूरे विश्व को एक सूत्र अथवा एक परिदृश्य मे बांध देने की एक महान उपलब्धि है।जिसे भावी पीढ़ियां एक गरिमा मयी लाभ का आनंद उठायेंगी। पूरे विश्व समाज को इसे हिन्दू धर्म से जोड़कर नही देखना चाहिए, भले ही यह भारत का एक अमूल्य ज्ञान है।और प्रकृति के 5 तत्त्वो,:-अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश तत्त्वो के संगठन पर आधारित है।
पाश्चात्य सभ्यता के पूर्ण रूप से देश में हावी हो जाने के चलते यह विद्या हमारे देश ही नहीं अपितु पूरे विश्व के लिए एक बहुत ही बड़ी रेमेडी है जो लोग आज मनोजेवीक रोगों के शिकार होने लगे लगे हैं।
इस विधा को सार्वजनिक रूप से अंतरराष्ट्रीय मूर्त रूप दे देना मोदी जी के अथक प्रयासों का ही परिणाम है।
इस विधा का सार्वजनिक हो जाने से भारत की आर्थिक विकास पर बड़ा ही सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। भारत के दवाईयां रक्षा उपकरण आदि खर्चो मे सम्मान जनक उपलब्धि हासिल हुई है।
योग एक ऐसी विधा है जिससे अमृत -तत्त्व की प्राप्ति होती है। भारत के बहु आयामी, बहुधर्मी देश होने की वजह से इसको समझ पाना थोड़ा टाइम टेकिंग है।
जय हिंद जय भारत।
बृजेश जोशी।
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आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जायेगा इस योगः की विधा को अंतरराष्ट्रीय मूर्त रूप दे देना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की एक अति महत्वपूर्ण उपलब्धि ही नही है अपितु पूरे विश्व को एक सूत्र अथवा एक परिदृश्य मे बांध देने की एक महान उपलब्धि है।जिसे भावी पीढ़ियां एक गरिमा मयी लाभ का आनंद उठायेंगी। पूरे विश्व समाज को इसे हिन्दू धर्म से जोड़कर नही देखना चाहिए, भले ही यह भारत का एक अमूल्य ज्ञान है।और प्रकृति के 5 तत्त्वो,:-अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी और आकाश तत्त्वो के संगठन पर आधारित है।
पाश्चात्य सभ्यता के पूर्ण रूप से देश में हावी हो जाने के चलते यह विद्या हमारे देश ही नहीं अपितु पूरे विश्व के लिए एक बहुत ही बड़ी रेमेडी है जो लोग आज मनोजेवीक रोगों के शिकार होने लगे लगे हैं।
इस विधा को सार्वजनिक रूप से अंतरराष्ट्रीय मूर्त रूप दे देना मोदी जी के अथक प्रयासों का ही परिणाम है।
इस विधा का सार्वजनिक हो जाने से भारत की आर्थिक विकास पर बड़ा ही सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। भारत के दवाईयां रक्षा उपकरण आदि खर्चो मे सम्मान जनक उपलब्धि हासिल हुई है।
योग एक ऐसी विधा है जिससे अमृत -तत्त्व की प्राप्ति होती है। भारत के बहु आयामी, बहुधर्मी देश होने की वजह से इसको समझ पाना थोड़ा टाइम टेकिंग है।
जय हिंद जय भारत।
बृजेश जोशी।


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