*देवो उत्थान एकादशी*की प्रासंगिकता/प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष देवता*
*देवो उत्थान एकादशी*की प्रासंगिकता/प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष देवता*:---------–------------------------------------ ------------दिनाँक 31अक्टूबर 2017 को देव शयनी उत्थान एकादशी मनाई गई। औऱ रात्री जागरण के रूप मे इस एकादशी के व्रत को मनाया गया।शास्त्रों के अनुसार विष्णु भगवान चातुर्मास की देव शयनी एकादशी के दिन योगः निद्रा में चले जाते हैं और उसके बाद4 महिने बाद आज कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को जागते हैं जिसे हम देवो उत्थान एकादशी भी कहते हैं।को उठो देवो जागो देवो के रूप में मनाते हैं। पद्म पुराण के अनुसार माता लक्ष्मी के अनुरोध पर ही श्री विष्णु भगवन् ने अपनी निद्रा की आदतों मे कंट्रोल किया था।और आलस्य से बाहर आकर ऊर्जावान होकर मांगलिक कार्यों का शुभारंभ किया गया था।देवो उत्थान एकादशी के दिन श्री हरि का तुलसी के साथ अयोजित होने वाला विवाह विशुद्ध मांगलिक और आध्यात्मिक प्रसंग है। इसलिए आज से मांगलिक कार्यों को करने के लिए विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है जो कि प्रकृति प्रदत्त होती है।अतः आप सभी को बूढ़ी दीपावली की उपलक्ष्य में शुभकामनाएं। वैसे तो देवता का अर्थ होता है process of knowing। जहाँ पर एक निरंतर जानने की प्रक्रिया बनी रहती है। त्रेता युग में भगवान विष्णु नेश्री राम के रूप मे अवतार लिया था द्वापरयुग मे श्री कृष्ण के रूप मे सतयुग में सत्यनारायण के रूप मे और अब कलियुग में कल्कि अवतार होगा। संहिता के अनुसार वेद में तीन शव्दों का प्रयोग है ऋषि, देवता, और छन्द।ऋषि का अर्थ है जानने वाला, देवता का अर्थ है जानने की प्रक्रिया, और छन्द का अर्थ है जिसके बारे मे जानना चाहते हैं अर्थात ज्ञान।। प्रत्यक्ष देवता:- जल, अग्नि, वायु, पृथ्वी, औऱ आकाश है।जो हमें अपनी प्रत्यक्ष उपस्थिति का एहसास और अनुभव कराते हैं।और अप्रत्यक्ष देवता इनके संगठनात्मक स्वरूप को नियंत्रित करते हैं।और परिस्थिति जन्य अवतरित होकर अपनी उपस्थिति का एहसास कराते हैं और जन कल्याण के लिए ऊतरदायी होजाते हैं।और यह सब प्राकृतिक रूप से ही होता है।बस जानने की जरूरत है पहचानने की जरूरत है।धन्यवाद। शुभकामनाओ सहित।बृजेश जोशी। जय हिंद जय भारत।।
Comments
Post a Comment