सहजता ही जीवन के विकास की पराकाष्ठा है

* सहजता ही जीवन के विकास की पराकाष्ठा है *           --------------------------------------------------------------------------सहजता ही जीवन के विकास की पराकाष्ठा है यानी कहने का मतलब है कि यदि आप जितने सहज होंगे उतना ही आपका सार्वभौमिक विकास होगा। नीचे दिए गए फोटोग्राफ से स्पष्ट होता है कि बच्चा अपने माँ के गर्भ में किस प्रकार से सहज है और किस प्रकार बाहरी आघातों से भी बेफिक्र होकर 9 माह तक अपना विकास करता है। और जब उसे एहसास होता है कि आगे के विकास लिए उसे धरती पर अवतरण होना ही पड़ेगा ,तब वह बहिर्मुखी होकर धरती पर अपने विकास के लिए आजाता है।जोकि एक पूर्ण रूप से प्राकृतिक प्रक्रिया है। और जब  वह उसी सहजता के साथ जीने का प्रयास करता है जिस सहजता के साथ गर्भ में पल रहा था तो उसे 9 दशकों तक अपने जीवन का विकास करने में कोई दिक्कत नही आती है।क्योंकि सहजता के साथ जीने मे उसे बाहरी आघातों से सामना नही करना पड़ता है।इसलिए हर व्यक्ति को सहजता के साथ जीने का प्रयास करना चाहिए। ताकि उसके जीवन में कम से कम तनाव इकठे हो सकें।।                                     हमारा देश भारत वर्ष विभिन्नताओं का देश है परंतु विभिन्न संस्कृति यो का होने के वावजूद एक सिरे मे पिरो रखने की कोई नीति नही है।क्योंकि अपनी मूल भूत संरचना पर जीने की शिक्षा नही दी जाती है। इसलिये बुलेट ट्रेन आने अथवा उसकी शिलान्यास करने का भी विरोध होता है विकास के नए आयाम स्थापित करने का भी विरोध होता है। भले ही वह व्यवस्था व्यक्ति को सीधे तौर से प्रभावित करती हो अथवा नही।अगर व्यक्ति सहज रहे तो स्वाभाविक रूप से उसका विकास होता है। धन्यवाद।।                                                बृजेश जोशी ।।।                       जय हिंद जय भारत।

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