योग की महत्ता एवम आवश्यकता

YOG:- *योग*  आज विश्व का अंतर्राष्ट्री कार्यक्रम बन गया है। और इसको अंतर्राष्ट्री स्तर पर आधिकारिक सर्वमान्यता दिलाकर भारत के यशश्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेशक जगत गुरु बनने का सौभाग्य प्राप्त किया है।परंतु भारत ही जहाँ विविधताओ  का देश है , मे योगः को संवैधानिक दर्जा दिला पाना एक टेड़ी खीर है। भले ही आधिकारिक तौर पर कार्यान्वित किया जा रहा हो।क्योंकि कि जब तक उसके तत्व ज्ञान को नही समझाया जा सकता तब तक उसका इम्पलीमेंट होना नाइंसाफी है।और इसको समझने के लिए दृष्टा की चेतना की आवश्यकता है।                                                         प्रमुखतया योग गंगा-जमुना की तरजीह है।यहाँ पर गंगा-जमुना की तरजीह का अर्थ है।इलाहाबाद मे जाकर दोनों का योग हो जाना।और फिर दोनों का उदगम से छोड़कर बीच के रास्तों मे जो भी गंदगी एकत्र हुई है, उसे निर्मूल कर पुनः अपने प्राकृतिक स्वरुप मे बहती है।उसी प्रकार योग की प्रक्रिया भी  शरीर मे एकत्र हुए  फॉरेन मटेरियल को निर्मूल करके अपने शुद्ध स्वरुप मे शरीर को लाती है।बेशक इसके लिए एक योग्य गुरु की आवश्यकता होती है। जय हिंद ।जय भारत। सभी धर्म गुरुओं को समर्पित।    साभार-बृजेश जोशी।

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